देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड की रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे एवं सूचना महानिदेशक वंशीधर तिवारी ने बृहस्पतिवार, देर साम को एफआरआई में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सभी व्यवस्थाओं को समयबद्व तरीके से चाक चौबंद करने के निर्देश दिए। इस दौरान गढ़वाल आयुक्त एवं सूचना महानिदेशक ने मुख्य पंडाल, स्टेज डिजाइन एवं लेआउट को लेकर इंजीनियर्स के साथ विस्तार से चर्चा की। साथ ही वीआईपी, वीवीआईपी और कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिए आम जनता हेतु बैठने की उचित व्यवस्था, पार्किंग, प्रवेश एवं निकासी आदि व्यवस्थाएं का भी जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान अपर निदेशक सूचना आशीष त्रिपाठी, सहायक निदेशक बद्री चंद नेगी, व्यवस्था अधिकारी रामपाल रावत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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व्यवसायिक एलपीजी सिलेण्डर वितरण के लिए नई एसओपीराज्य को मिला अतिरिक्त 26 प्रतिशत का कोटासचिव आनंद स्वरूप ने जारी की संशोधित एसओपीदेहरादून। राज्य में व्यवसायिक एलपीजी सिलेण्डरों की बढ़ती मांग और आपूर्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए पूर्व में निर्धारित एसओपी को अतिक्रमित करते हुए नई संशोधित एसओपी लागू कर दी गई है। सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्री आनंद स्वरूप ने बताया कि राज्य द्वारा पीएनजी को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए प्रयासों के फलस्वरूप उत्तराखण्ड को व्यवसायिक एलपीजी हेतु अतिरिक्त 6 प्रतिशत कोटा प्राप्त हुआ है, जबकि 20 प्रतिशत कोटा केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में प्रदान किया गया था। इस प्रकार पूर्व निर्धारित 40 प्रतिशत के कोटे में वृद्धि करते हुए अब कुल 66 प्रतिशत कोटे के आधार पर नई व्यवस्था लागू की गई है। बता दें कि पूर्व में 40 प्रतिशत कोटे के अनुसार एसओपी निर्धारित की गई थी।श्री स्वरूप ने बताया कि नई एसओपी का उद्देश्य विभिन्न उपभोक्ता वर्गों के बीच संतुलित, प्राथमिकता आधारित एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि चारधाम यात्रा, पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों एवं आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह व्यवस्था अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेगी।श्री स्वरूप ने बताया कि राज्य में कार्यरत तेल एवं गैस विपणन कंपनियों द्वारा उनकी बाजार हिस्सेदारी के अनुसार एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सभी जिलाधिकारियों को आपूर्ति की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी और भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।